सैंधव स्थापत्य/वास्तुकला
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Indus Valley Architecture ( सैंधव स्थापत्य/वास्तुकला)
सिंधु सभ्यता भारत की प्रमाणिक सबसे प्राचीन सभ्यता है।
सिंधु सभ्यता को और भी नामों से जाना जाता है जो कि निम्नलिखित हैं -
रेडियो कार्बन विधि के अनुसार इसे तीन चरण में बांटा गया है ।
सिंधु सभ्यता को और भी नामों से जाना जाता है जो कि निम्नलिखित हैं -
- हड़प्पा सभ्यता
- सिंधु सरस्वती सभ्यता
- कांस्य युगीन सभ्यता
- प्रथम नगरीय क्रांति
विस्तार-
- उत्तर में - मांडा (जम्मू एंड कश्मीर)
- दक्षिण में - दैमाबाद (महाराष्ट्र)
- पूर्व में - आलमगीरपुर ( उत्तर प्रदेश)
- और पश्चिम में- सुक्तागेंडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)
काल-निर्धारण
सिंधु सभ्यता के काल क्रम में कई विद्वानों के बीच मतभेद हैं ।रेडियो कार्बन विधि के अनुसार इसे तीन चरण में बांटा गया है ।
- पूर्व हड़प्पाई चरण - लगभग 3500 ई० पू० से 2600 ई०पू०
- परिपक्व हड़प्पाई चरण - लगभग 2600ई०पू० से 1900ई०पू०
- उत्तर हड़प्पाई चरण - लगभग 1900 ई० पू० से 1300 ई०पू०
सिंधु सभ्यता का सबसे मान्य कालक्रम - लगभग 2350 ई०पू० से 1750 ई०पू० है ।
सैंधव कला --
सैंधव कला के अंतर्गत प्रस्तर धातु एवं मूर्तियों का उल्लेख मिलता है और इसके अतिरिक्त मोहरे, मनके और मृदभांड, ताम्रपट्टिकाएँ भी मिली है।सैंधव वास्तुकला की निम्नलिखित विशेषतायें हैं -
- सैंधव कला उपयोगितामूलक थी । सिंधु सभ्यता की सबसे प्रभावशाली विशेषता उसकी नगर निर्माण योजना एवं जल निकास प्रणाली थी ।
- सिंधु सभ्यता की नगर योजना में दुर्ग योजना, स्नानागार, अन्नागार, वाणिज्यिक परिसर आदि महत्वपूर्ण हैं ।
- सिंधु सभ्यता के समस्त नगर आयताकार खंड में विभाजित थे । जहां सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी इसे ग्रिड प्लानिंग कहा जाता है ।
- हड़प्पा सभ्यता के नगरों में कहीं भी मंदिर का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है
- घर के गंदे पानी की निकासी के लिए ढकी हुई नालियां बनाकर इन्हें मुख्य नाले से जोड़ दिया गया था ।
- जल आपूर्ति व्यवस्था का साक्ष्य धौलावीरा से मिला है जहां वर्षा जल को शुद्ध कर उसकी आपूर्ति की जाती थी ।
- सिंधु सभ्यता में भवनों में पक्की और निश्चित आकार की ईटों के प्रयोग के अलावा लकड़ी और पत्थर का भी प्रयोग होता था ।
- सिंधु सभ्यता के नगरी क्षेत्र के दो हिस्सों में बांटा गया था पश्चिमी टीला और पूर्वी टीला ।
- पश्चिमी टीला पूर्वी टीला की अपेक्षा ज्यादा ऊंचाई पर बसा था तथा यह दुर्गी कृत (फोर्टिफाइड) होता था ।
- बरामदा घर के बीचो-बीच बनाया जाता था और मुख्य द्वार हमेशा घर के पीछे खुलता था ।
- हड़प्पा से प्राप्त विशाल अन्नागार, मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार, अन्नागार, सभा भवन परिसर तथा लोथल( गुजरात) से प्राप्त व्यावसायिक क्षेत्र परिसर और विशालतम गोदिवाड़ा हड़प्पा सभ्यता की नगर निर्माण योजना के उत्कृष्ट नमूने हैं ।
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- हड़प्पा सभ्यता(2350-1750ई०पू०) में स्थापत्य में जो ऊंचाई प्राप्त की थी । वह वैदिक काल(1500-600ई०पू०) तक आते-आते समाप्त हो चुकी थी। अतः वैदिक काल स्थापत्य कला की दृष्टि से हास् का काल था ।
SOURCES-
Ancient History by SK Pandey, JHA&SHRIMALI AND Drishti IAS



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